सुयशगुप्त गुरुदेव आपकी, आरतियाँ हम गायें ॥

सुयशगुप्त गुरुदेव आपकी, आरतियाँ हम गायें ॥
गुरुवर के चरणों में नमन, गुरुवर के चरणों में नमन...
वीणा माँ के राजकुंवरजी, पिता पवन के प्यारे।
नगर हाट पिपल्या में जन्मे, गौर वर्ण मनहारे ॥
चौदह फरवरि सन सतसत्तर, मंगल घडी कहायें
। सुयशगुप्त गुरुदेव आपकी, आरतियाँ हम गायें।
गुरुवर के चरणों में नमन, गुरुवर के चरणों में नमन...
बडभागी संभाजी नगरी, दीक्षा हुई तुम्हारी ।
गुप्तिनंदी गुरु के चरणों की, छत्र छाँव सुखकारी ॥
बालयतीश्वर बनकर गुरुवर, दूजे वीर कहायें।
सुयशगुप्त गुरुदेव आपकी, आरतियाँ हम गायें ॥
गुरुवर के चरणों में नमन, गुरुवर के चरणों में नमन...
हे गुरुवर! ये सुनो निवेदन, हमको भव से तारों।
दो आशीष हमें ये ही हम, तिर जायें गति चारों ॥
नाम सरीखा सुयश आपका, चंद्र सरीखा छायें।
सुयशगुप्त गुरुदेव आपकी, आरतियाँ हम गायें ॥
गुरुवर के चरणों में नमन, गुरुवर के चरणों में नमन
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